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चंद्रप्रभावटी: आयुर्वेद का बहुमूल्य रत्न

On: November 8, 2025 10:42 AM
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चंद्रप्रभावटी
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आयुर्वेदिक चिकित्सा में चंद्रप्रभावटी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। इसे आयुर्वेद का रत्न कहा जाता है क्योंकि यह एक ही समय में अनेक रोगों पर असर करती है। यह विशेष रूप से मूत्र संबंधी रोग, मधुमेह, पथरी, थायरॉइड, स्त्री रोग और शारीरिक कमजोरी जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर को संतुलित करते हुए दीर्घकालिक लाभ देती है और किसी भी एक अंग पर अनावश्यक दबाव नहीं डालती।

चंद्रप्रभावटी क्या है?

चंद्रप्रभावटी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक टैबलेट (Vati) है जो लगभग 37 से अधिक जड़ीबूटियों और प्राकृतिक खनिजों से तैयार की जाती है। इसमें शामिल प्रमुख घटक हैं – शिलाजीत, त्रिकटु (सोंठ, मिर्च, पिपली), त्रिफला, लौह भस्म, गुग्गुल, वंशलोचन, यवक्षार, और सुगंधित द्रव्य। इन सबका मिश्रण शरीर में दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार, यह दवा दीपन (भोजन पचाने में सहायक), पाचन सुधाकर, मूत्रवर्धक, बलवर्धक और रक्त शुद्धिकारक गुणों से युक्त है।

चंद्रप्रभावटी के प्रमुख फायदे

1. मूत्र संबंधी रोगों में लाभकारी

चंद्रप्रभावटी का सबसे अधिक प्रयोग पेशाब से जुड़े रोगों में होता है।

-बार-बार पेशाब आना

-मूत्र में जलन

-मूत्र रुक-रुक कर आना

-पेशाब में इंफेक्शन
इन सभी स्थितियों में यह प्रभावी मानी जाती है। इसके मूत्रवर्धक गुण मूत्रमार्ग को साफ करते हैं और संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं।

2. पथरी और किडनी हेल्थ

गुर्दे की पथरी या बार-बार होने वाली रेत जैसी समस्या में चंद्रप्रभावटी लाभ देती है। यह मूत्र मार्ग को खुला रखती है और पथरी को गलाने तथा उसके टुकड़े बाहर निकालने में सहायक होती है।

3. मधुमेह (Diabetes) में सहायक

चंद्रप्रभावटी का नियमित सेवन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें मौजूद शिलाजीत और त्रिकटु अग्नि (पाचन शक्ति) को प्रबल करते हैं और ग्लूकोज को संतुलित ढंग से उपयोग करने में मदद करते हैं।

4. स्त्री रोगों में लाभकारी

महिलाओं में सफेद पानी (Leucorrhoea), मासिक धर्म की अनियमितता, कमज़ोरी, थायरॉइड और गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं में भी चंद्रप्रभावटी का उपयोग किया जाता है। यह गर्भाशय को मजबूत बनाती है और हार्मोनल संतुलन में मदद करती है।

5. पुरुषों के लिए टॉनिक

पुरुषों में वीर्य की कमी, शीघ्रपतन, शारीरिक थकान और यौन शक्ति की कमजोरी में भी यह वटी लाभकारी है। शिलाजीत और गुग्गुल जैसे तत्व इसे एक प्राकृतिक ऊर्जा टॉनिक बनाते हैं।

6. त्वचा और रक्त शुद्धि

यह रक्त को शुद्ध करने के साथ-साथ त्वचा संबंधी रोगों जैसे खुजली, फोड़े-फुंसी और दाग-धब्बों को कम करने में भी मदद करती है।

7. थायरॉइड और मोटापा

चंद्रप्रभावटी का प्रयोग थायरॉइड की समस्या और वजन असंतुलन में भी किया जाता है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और शरीर से अतिरिक्त वसा को बाहर निकालने में मदद करती है।

सेवन विधि और मात्रा

आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अनुसार इसकी सामान्य खुराक होती है:

a-1–2 गोली सुबह और शाम, गुनगुने पानी या दूध के साथ।

b-यदि मूत्र संबंधी रोग है तो इसे गोखरू, वरुणादि क्वाथ या नारियल पानी के साथ भी दिया जा सकता है।

ध्यान रहे: खुराक व्यक्ति की आयु, रोग और स्थिति के अनुसार बदल सकती है।

सावधानियाँ

  1. डॉक्टर की सलाह लें – किसी भी दवा की तरह इसे भी आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में लेना चाहिए।
  2. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ इसका सेवन न करें।
  3. अत्यधिक खुराक लेने से दस्त, कमजोरी या पेट दर्द हो सकता है।
  4. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ ले रहे लोगों को इसका सेवन करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

निष्कर्ष

चंद्रप्रभावटी आयुर्वेद का एक बहु-गुणकारी चूर्ण है जो अनेक रोगों में लाभकारी है। मूत्र विकारों से लेकर मधुमेह, पथरी, थायरॉइड, स्त्री-पुरुष जनित समस्याओं और त्वचा रोगों तक, इसके फायदे व्यापक हैं। यह न सिर्फ रोगों से राहत देती है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा को भी बढ़ाती है।

हालांकि, हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह लिए इसका सेवन करना उचित नहीं है। सही मार्गदर्शन और उचित मात्रा में लेने पर यह वास्तव में स्वास्थ्य को चंद्रमा की तरह शीतलता और शक्ति प्रदान करने वाली औषधि है।

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